Monday, April 27, 2009

प्रतिमा

ईश्वर और राक्षस 
नर और नारी।

आग और पानी
एक ही रूप के दो स्वरुप।

मनस्थिति और परस्थिति
वातावरण और स्थान
समय और आयाम।

स्वरुप को देते रूप
इन सब से सृष्टी
नतमस्तक हम उस सृष्टीकर्ता के

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