एक गीत तुम गुनगुनाओ
मधुर प्रेम की इस तरह
भूल जाएँ सारे तमाशे देखना जिस तरह
समाधी मेरी हो जाये , मुक्त मैं हो जाऊँ
भूल के इस देह, समाज को, तुम में एक हो जाऊँ।
गीत तुम गाओ प्राण मेरे थिरकें
इस प्रपंच से ध्यान मेरा टूटे।
मधुर प्रेम की इस तरह
भूल जाएँ सारे तमाशे देखना जिस तरह
समाधी मेरी हो जाये , मुक्त मैं हो जाऊँ
भूल के इस देह, समाज को, तुम में एक हो जाऊँ।
गीत तुम गाओ प्राण मेरे थिरकें
इस प्रपंच से ध्यान मेरा टूटे।

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