Thursday, June 11, 2009

गुहार

नहीं जाना मुझे इश के द्वार को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे ममता के कोख को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे पिता के दुलार को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे मित्र के स्नेह को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे प्रीतम के आलिंगन को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे संतान के मोह को छोड़ कर
नहीं जाना मुझे इस संसार को छोड़ कर
गुहार है मेरी अपने भाग्य से 

No comments:

Post a Comment