दिन के रोशनी में
बातों के उलझन से
रस को निचोड़ कर
जिन्दगी के स्लेट पर उतार खुश हो जाती हूँ
समय के पाठ को
लोगों के विचार को
जिंदगी के अनुभव को पढ़ और जान कर खुश हो जाती हूँ
ख्यालों के बरसात में
शब्दों को समेट कर
मन के स्लेट पर
बिखेर कर खुश हो जाती हूँ

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