सुनो तुम यह बात
रखना अपने साथ
मन मेरा आज चारो दिशा भागे
मानो वो है आज हवा पे सवार
रोकूँ मैं कैसे इसको
उतारूँ मैं कैसे इसको
गिरने का भय है
घाव होने का भय है
पर यह तो मस्त मलंग हैं
निर्भय और निश्चय है
सदा रह सकता यह हवा पर सवार
सदा रह सकता यह एस पथ का यायावर
हाथ पकड़ कर रोकूँ इसे
एक दिशा को मोडूँ इसे
समेट अपना सामर्थ
चार नहीं चल एक दिशा पर
यह अद्भूत देव कमाल है
एक दिशा में चारो दिशा व्याप्त हैं
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