मन मेरा आज पवन
भागे चारो दिशा ओर
पल को स्पर्श करे
फिर मस्त मलंग हो
चले नयी दिशा ओर
मलंग है या बौराया ?
मन मेरा आज तितली
एक डाल पर नहीं थमती
कांटे ,फूल पत्ते सभी पर जाती
बात एक, की डोर नहीं जमती
समय नहीं कटती
चंचल या नादान ?
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