Wednesday, July 14, 2010

मन

मन मेरा आज पवन
भागे चारो दिशा ओर
पल को स्पर्श करे
फिर मस्त मलंग हो
चले नयी दिशा ओर
मलंग है या बौराया ?      


मन मेरा आज तितली
एक डाल पर नहीं थमती
कांटे ,फूल पत्ते सभी पर जाती
बात एक, की डोर नहीं जमती
समय नहीं कटती
चंचल  या नादान ?

No comments:

Post a Comment