ठहाकों से भी खंडहर दिल की खामोशियाँ भरती नहीं ,
आखों की नमी दिल के घाव धोती नहीं ,
जिन्दगी सहारों से चलती नहीं ,
अगर ये सब सच है तो
मुझे भीड़ के बीच अकेले चलना मंजूर नहीं .
आखों की नमी दिल के घाव धोती नहीं ,
जिन्दगी सहारों से चलती नहीं ,
अगर ये सब सच है तो
मुझे भीड़ के बीच अकेले चलना मंजूर नहीं .

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