अब तो जैसे सियाही रात आगई
जीने की वजह ही ना रही
विदेह हो कर जग ने रहने ना दिया
भावनाओं को कुचल कर ख़तम कर दिया
अब कहता है जियो पर भूलो नहीं की
जरूरत तो तुम्हारी अब हमें रहीं नहीं
जीने की वजह ही ना रही
विदेह हो कर जग ने रहने ना दिया
भावनाओं को कुचल कर ख़तम कर दिया
अब कहता है जियो पर भूलो नहीं की
जरूरत तो तुम्हारी अब हमें रहीं नहीं

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