भगवती आरती मैथिलि
प्रबल ढंड प्रचण्ड भुजबल ,कोटि दानव वीर हे ,
नहिक देखि उपाय ततछन , ठाड़ भेली रणधीर हे |
लय तुरंग - तुरंग चतुरंग, सिगंह पिठिया सवार हे ,
दंत झल झल हसंती खल खल , शुब्र दन्त विदारी हे |
नाचो जोगिनी ताल दय दय , जोगिनी दल संग हे |
मुंड भल भल हंसती खल खल ,मातु आज बिराजी हे|
कतेक हाँथी हुँकार मारल ,कतेक धुरी मिलाओ हे ,
कतेक खड्गी चरण चापल , धरा पर छितरैल हे |
गौरी पति कर जोरि गोचर आदी शंकर प्रणाम हे ,
दक्ष यक्ष प्रतयक्ष भय भय दिए अभय वरदान हे|
नहिक देखि उपाय ततछन , ठाड़ भेली रणधीर हे |
लय तुरंग - तुरंग चतुरंग, सिगंह पिठिया सवार हे ,
दंत झल झल हसंती खल खल , शुब्र दन्त विदारी हे |
नाचो जोगिनी ताल दय दय , जोगिनी दल संग हे |
मुंड भल भल हंसती खल खल ,मातु आज बिराजी हे|
कतेक हाँथी हुँकार मारल ,कतेक धुरी मिलाओ हे ,
कतेक खड्गी चरण चापल , धरा पर छितरैल हे |
गौरी पति कर जोरि गोचर आदी शंकर प्रणाम हे ,
दक्ष यक्ष प्रतयक्ष भय भय दिए अभय वरदान हे|

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